Friday, March 18, 2011
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फेस बुक का क्रेज
आजकल फेसबुक का जमाना आ गया है, लोग अब ब्लाग को विस्मृत करते जा रहे है। ब्लाग में जो विचार उभरकर आते थे वह निश्चित रुप से पठनीय हुआ करता था ...
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समय बदलने के साथ होली का स्वरुप भी बदल गया है. पहले होली का इंतजार होता था. गांवों की होली अदभूत होती थी. धीरे-धीरे होली का मायने ही बदल गया...
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राज्य स्थापना का ग्यारहवां वर्ष हम मनाने जा रहे हैं, इन ग्यारह वर्षो में छत्तीसगढ़ ने क्या खोया क्या पाया. यह आज चिंतन करने की जरुरत है.जह...
priy rajendra, tum bhi samay ke sath chal pade ho, khushi ki baat hai. patrkaritaa ko jeevant banane ke liye sahitya ka sath nuksaan deh nahi ho sakataa.
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